चौधरी अजित सिंह को पत्रकारों ने किसान नेता की जगह सिर्फ जाट नेता क्यों घोषित करना चाहा?

चौधरी अजित सिंह की मृत्यु के बाद कुछ अखबार के पत्रकारों ने उन्हें सिर्फ जाट नेता घोषित करना चाहा और बड़े-बडे़ अक्षरों में लिखा कि जाट नेता अजित सिंह की मौत। इन पत्रकारों ने ऐसा क्यों किया आज इस बात का विश्लेषण करते हैं।

Updated On: May 8, 2021 20:14 IST

Dastak

Photo Source- Social Media

अजय चौधरी

राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी अजित सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। वे लंबे समय तक किसानों के लिए संघर्ष करते रहे। पश्चिमी उत्तरप्रदेश के लोग जानते हैं कि उनका संघर्ष कभी एक जाति विशेष के लिए नहीं जबकि पूरे किसान तबके के लिए था। चाहे वो क्षेत्र में गन्ना मील लगवाने की बात हो या फिर पश्चिमी उत्तरप्रदेश को अलग हरित प्रदेश बनवाने की मांग। लेकिन चौधरी अजित सिंह की मृत्यु के बाद कुछ अखबार के पत्रकारों ने उन्हें सिर्फ जाट नेता घोषित करना चाहा और बड़े-बडे़ अक्षरों में लिखा कि जाट नेता अजित सिंह की मौत। इन पत्रकारों ने ऐसा क्यों किया आज इस बात का विश्लेषण करते हैं।

क्या किसी साजिश के तहत अजित सिंह को सिर्फ जाट नेता घोषित किया गया? 

न सिर्फ चौधरी अजित सिंह बल्कि ठीक ऐसा ही किसान आंदोलन के साथ हुआ है। पंजाब में रहने तक उसे सरदारों का आंदोलन और हरियाणा और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में घुसने पर उसे जाट आंदोलन बनाने की कोशिश की गई। ताकि किसानों के मुद्दे से जातियों में बंट बाकि समाज मुंह फेर ले। ऐसा किसानों के हक की लड़ाई को कमजोर करने के लिए गोदी मीडिया द्वारा किया गया। इसके पीछे किसानों में फूट डालने का एजेंडा नजर आता है।

2013 का मुज्जफरनगर दंगा भी जाट बनाम मुस्लमान घोषित कर दिया बहुत से लोगों ने। मतलब ये है कि उस क्षेत्र की एक प्रमुख जाति उठाओ और सब उसपर थोप दो। उसी नीति पर तथाकथित पत्रकार चलते हैं। हो सकता है कि उन्हें ऐसा करने के लिए अपने राजनीतिक आकाओं से आदेश मिलते हों।

पूर्व पत्रकार और वर्तमान में राष्ट्रीय लोकदल के सदस्य प्रशांत कनोजिया अपनी ट्वीट में लिखते हैं: पत्रकार चतुर्वेदी के अनुसार अरुण जेटली जी की राजनीति सिर्फ DDCA तक सीमित थी और कभी छात्र संघ के अलावा कोई चुनाव नहीं जीते लेकिन वो Formidable Modern Politician थे और 7 बार लोकसभा सांसद और कई बार केंद्रीय मंत्री आदरणीय चौधरी जी सिर्फ जाट नेता थे।

बीजेपी आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने 2014 में एक ट्वीट में लिखा था- अजित सिंह ने खुद को जाट नेता के रूप में देखा है, वो और उनका बेटा दोनों लोकसभा चुनावों में केवल जाट बहुल क्षेत्रों से ही चुनाव लडे हैं। इस ट्वीट से पता चलता है कि बीते कई सालों से अजित सिंह को सिर्फ एक जाति विशेष का नेता बनाने का काम चल रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं: चौधरी अजीत सिंह जी सिर्फ जाट नेता थे, और "मिठाई में जहर" समान अटल बिहारी वाजपेयी, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में हिंसा करवाई, जिनके समय गुजरात दंगे हुए, कारगिल में घुसपैठ हुई, जाति जनगणना रुकवाई, ताबूत घोटाला हुआ, सरकारी पेंशन ख़त्म हो गई, वे राष्ट्रीय नेता थे? कैसे? समझाइए।

अजित सिंह आईआईटी से पढ़े लिखे लेकिन कभी इस बात को सराहा नहीं गया-

इंस्टाग्राम पर इस संबध में एक पोस्ट डाली गई है। जिसमें लिखा है कि मनोहर पर्रिकर और अरविंद केजरीवाल से काफी पहले एक आईआईटीएन (आईआईटी से पढ़ने वाला) राजनीति में आ चुका था। लेकिन जिस तरह की लहालौट कर देने वाली कहानियां इन दोनों के लिए बुनी गई और पढ़े लिखों को तवज्जो देने की बात की गई। वैसी कहानियां चौधरी अजित सिंह के लिए कभी नहीं गढ़ी गई। निचले तबके से किसी उभरते हुए नेता को जाति व वर्ग विशेष तक सीमित कर देने में हमारी जातिवादी मीडिया पारंगत है। कितनी लज्जा की बात है कि किसान नेता अजित सिंह के जाने के बाद भी मीडिया उन्हें महज एक जाति विशेष के रुप में चिन्हित कर रहा है।

 

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मीडिया में होना चाहिए हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व-

मीडिया में हर क्षेत्र का पत्रकार होना चाहिए। ताकि हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व दिखे और क्षेत्र की तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सामने आ सके। ताकि तथ्यों को जातिगत बना कर खत्म न किया जा सके। अनुमान के मुताबिक फिलहाल नेशनल मीडिया में 90 प्रतिशत पत्रकार बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश के हैं। इन पत्रकारों का दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों को देखने का नजरिया अलग है। ये रहते दिल्ली में ही हैं और कभी यहां के लोगों के साथ जमीन स्तर पर नहीं जुड पाते। इसलिए मीडिया में सभी क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी जरुरी हो जाती है। आप सभी मीडिया संस्थानों में नजर दौडाएं और देखें उनमें कितने पत्रकार पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तरप्रदेश या राजस्थान आदि से हैं। आपके सामने केवल गिनती के नाम होंगे। आपको इस क्षेत्र में भी आना होगा तभी आपकी सही आवाज देश और दुनिया तक जा पाएगी।

(लेखक दस्तक इंडिया के एडिटर हैं, अजय चौधरी के फेसबुक पेज का लिंक-https://www.facebook.com/Ajaychaudharyyy/)

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