जब विदेश से वैक्सीन मिलनी नहीं थी तो केंद्र ने राज्यों को टेंडर जारी करने की अनुमति क्यों दी? पढें

दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र ने बता दिया कि वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना और फाइजर ने उन्हें साफ कह दिया है कि वो वैक्सीन भारत को देने से संबिधित किसी भी मामले में राज्यों से नहीं सीधे भारत सरकार से बात करेंगी।

Updated On: May 25, 2021 12:30 IST

Dastak

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अजय चौधरी

विदेश से वैक्सीन लेकर आने को लेकर जो हाय तौबा मची है, इसपर मैंने पहले ही लिख दिया था कि वैक्सीन कोई आलू-टमाटर नहीं जो विदेशी कंपनियां इसे भारत के राज्यों में बांट देगी। फिर भी केंद्र ने राज्यों को टेंडर जारी करने की अनुमति क्यों दी? इसी सवाल की हम आगे पड़ताल कर रहे हैं।

वैसे भारत के राज्य आलू-टमाटर भी बिना भारत सरकार के इंपोर्ट-एक्सपोर्ट नहीं करते हैं। लेकिन वैक्सीन के लिए केंद्र सरकार ने उन्हें छूट दे दी। खुद केंद्र को ही वैक्सीन नहीं मिल रही थी लेकिन बावजूद इसके सबने टेंडर जारी कर दिए वैक्सीन के लिए चुनिंदा विदेशी कंपनियों को।

28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों को लगाकर 36 तरह के टेंडर चुनिंदा वैक्सीन कंपनियों को जारी हुए होंगे। कंपनियों के सामने देश की छवि और कितना सरदर्द हुआ होगा उसका अंदाजा लगाना भारी है।

सबने तो बताया नहीं लेकिन विशेषकर दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र ने बता दिया कि वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना और फाइजर ने उन्हें साफ कह दिया है कि वो वैक्सीन भारत को देने से संबिधित किसी भी मामले में राज्यों से नहीं सीधे भारत सरकार से बात करेंगी। टेंडर बीजेपी राज्यों ने भी जारी किए थे लेकिन वो इसपर चुप्पी साधे हैं। वो केंद्र को कोई राय कैसे दे सकते हैं? आखिर गद्दी प्यारी सबको है। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलते वक्त नहीं लगा, चाहे कैसा भी बनाया लेकिन बनाया।

कंपनियां भारत सरकार से ही बात करेंगी और पहले भी कर ही रही थी राज्यों का इसमें कोई रोल होना ही नहीं चाहिए था ये बात तो साधारण सा भारतीय नागिरक भी समझ सकता है। बावजूद इसके केंद्र ने वैक्सीन के लिए राज्यों को छूट क्यों दे दी? जबकि इससे पहले देश में ही निर्मित कोवैक्सीन और कोवीशिल्ड ने भी राज्यों को सीधे तौर पर वैक्सीन देने से मना कर दिया था। भारत सरकार जिस राज्य को जितनी अलॉट कर रही है उतनी वैक्सीन मिल रही है।

इसके पीछे मुझे जो कारण नजर आ रहा है वो है भारत सरकार का वैक्सीन खरीद का बोझ अपने ऊपर न लेकर राज्यों के सर पर डालना। क्योंकि भारत सरकार अगर सीधे तौर पर वैक्सीन खरीद कर राज्यों को बांटे तो राज्य उसमें फ्री वैक्सीनेशन की सीधी मांग पहले से ही कर रहे हैं, सारा खर्च केंद्र को ऐसे में सीधे तौर पर खुद ही वहन करना पड़ जाता।

मेरे अनुसार केंद्र राज्यों से टेंडर जारी कराकर उनका बजट और मांग देख लेना चाहता होगा। टेंडर जारी करते वक्त पहले ही उसका बजट तैयार कर लिया जाता है। केंद्र को भी ये बात अच्छे से पता थी कि राज्यों को वैक्सीन कोई नहीं देने वाला वो बस राज्यों की जानकारी हासिल करने के लिए ही ऐसा कर रहा था।

एक बात यह भी साफ है कि केंद्र सरकार खुद वैक्सीन खरीदकर देश के लोगों को नहीं देना चाहती। वो कौवेक्सीन और कोवीशिल्ड के चल रहे वैक्सीनेशन प्रोग्राम से पहले ही परेशान है। उसने कहा हुआ है कि राज्यों को वैक्सीन की कीमत चुकानी होगी। वो कोविशिल्ड के वैक्सीन एक्सपोर्ट करने पर भी कुछ नहीं बोलना चाहती न ही इसकी कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ आदर पूनावाला के ब्रिटेन जाकर बैठ जाने के बारे में।

हमारे विदेश मंत्री जयशंकर वैक्सीन के मामले में कंपनियों से बात करने विदेश दौरे पर हैं। हमें समझना होगा वो वैक्सीन खरीदने नहीं बल्कि वैक्सीन कंपनियों को ये बताने गए हैं कि जनसंख्या के आधार पर भारत बड़ा बाजार है। आप अपनी वैक्सीन वहां सीधे बेचें उसमें हम आपकी पूरी सहायता करेंगे कानून के मामले में भी और आपको अपने कार्य में मदद के लिए स्थानीय पार्टनर देने में भी।

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साफ है सरकार सीधे तौर पर कुछ जिम्मेदारी सर पर नहीं लेना चाहती। ये कोई नई नीति नहीं है, केंद्र सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपकर जिम्मेदारी से बचने की नीति पर चलता आ रहा है पहले से ही। लालकिले का निजिकरण, रेलवे का निजीकरण, रेलवे स्टेशन का निजिकरण, इंडियन ऑयल और एयर इंडिया के निजिकरण की योजना भी इन्हीं नीतियों की तरफ इशारा करती है। सरकार को बस अपना एक अलग हिस्सा चाहिए, बाकी जय राम जी की।

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(लेखक दस्तक इंडिया के एडिटर हैं)

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