राजस्थान में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए आम लोगों द्वारा बनवाई जा रही है 40 कीलोमीटर लंबी दीवार

राजस्थान के बीकानेर में 40 किलोमीटर लंबी दीवार बनने जा रही है। ये दीवार वन्य जीवों और पेड पौधों की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही है। लोगों का प्रकृति और वन्य जीवों को बचाने के लिए प्रेम इस कदर है कि वो इतनी लंबी दीवार में आने वाला खर्च भी खुद ही जुटा रहे हैं।

Updated On: Jul 17, 2021 14:03 IST

Dastak

Photo Source- Social Media

राजस्थान के बीकानेर में 40 किलोमीटर लंबी दीवार बनने जा रही है। ये दीवार वन्य जीवों और पेड पौधों की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही है। लोगों का प्रकृति और वन्य जीवों को बचाने के लिए प्रेम इस कदर है कि वो इतनी लंबी दीवार में आने वाला खर्च भी खुद ही जुटा रहे हैं। बिना किसी सरकारी मदद के ये दीवार बन रही है और बीकानेर में इसका निर्माण कार्य भी शुरु किया जा चुका है। 9 इंच मोटी और 40 किलोमीटर लंबी इस दीवार में 70 लाख से अधिक ईंटें लगाई जानी हैं। इसके लिए आम लोग पांच करोड़ रुपए एकत्रित कर रहे हैं। ऐसे में राजस्थान के लोग प्रकृति और वन्य जीवों के प्रति प्रेम के रुप में पूरे देश के सामने मिसाल पेश कर रहे हैं।

इन वन्य जीवों और पेड़ के लिए बनाई जा रही है दीवार-

यहां तीन लाख से अधिक खेजड़ी के पेड हैं जो राजस्थान की धरोहर हैं, ये मई और जून के भीष्ण गर्मी वाले महीनों में भी हरे-भरे रहते हैं। इन्हें बचाना बेहद जरुरी है। यहां चार हजार से अधिक गाएं हैं, हजार नील गाएं हैं, पांच हजार से अधिक हिरण हैं, चार हजार खरगोश हैं और काफी संख्या में सांप और चूहें भी हैं। इन सबको सड़क और रेल आदि दुर्घटनाओं से बचाना और इनके जीवन में मानवीय छेड़छाड़ को कम करना ही दीवार बनाने का लक्ष्य है। जहां ये दीवार बनाई जा रही है वो करीब 27 हजार बीघा जमीन है, जिसे कवर किया जा रहा है।

फिलहाल यहां चार हजार के करीब गाय रोजाना चरने के लिए आती हैं और हिरण और नील गाय भी बडी संख्या में है। इन सब के लिए यहां पीने के पानी की व्यवस्था की गई है और छोटे-तलाब  और कुंडी भी बनाए हुए हैं। टैंकर के द्वारा नियमित रुप से यहां पानी की व्यवस्था की जाती है।

पर्यावरण प्रेमी बृजनारायण किराडू के प्रयासों से बन रही है दीवार-

बिना किसी सरकार चाहे वो केंद्र की मोदी सरकार हो या फिर राज्य की गहलोत सरकार, इनके बिना ही इस दीवार को बनाया जा रहा है। पांच करोड़ की लागात इसपर आ रही है इस रकम को जुटाना भी बडा काम है और ये संभव हो पा रहा है पर्यावरण प्रेमी बृजनारायण किराडू की मेहनत और लग्न के चलते। न सिर्फ किराडू बल्कि उनका पूरा परिवार इस कार्य में जुटा है।

ये काम सिर्फ दीवार बनाने तक सीमित नहीं था, इस कार्य के लिए किराडू को कई भूमाफियाओं से लड़ना पड़ा था जो इस भूमि पर कब्जा जमाए थे। उन्हें इसके लिए अदालत में कई मामलों में बतौर ग्वाह भी पेश होना पड़ा था। ये दीवार गोचर भूमि को सुरक्षित करने के लिए बनाई जा रही है। बीकानेर से जैसलमेर की तरफ राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब ये दीवार बनाने का शुरु किया गया है। ये वन्य जीव क्षेत्र या जंगल न होकर केवल एक गोचर भूमि है जिसे महाराजा करण सिंह ने उस समय गायों के चरने के लिए सुरक्षित रखा था।

दीवार हो जाने से इस भूमि पर सुरक्षा के साथ अतिक्रमण का खतरा भी घट जाएगा। इस जमीन के चारों तरफ ये दीवार बनाई जा रही है। किराडू के अनुसार अगर साफ हवा और ऑक्सीजन आम जनता को चाहिए तो उन्हें ऐसी जगहों को बचाना होगा और इसलिए आम जनता अपने धन से इस दीवार को बनवा भी रही है।

इस जमीन पर सिर्फ गायों के चरने की अनुमति-

इस जमीन का कुल क्षेत्रफल 27 हजार 205 बीघा 18 बिस्वा है। सरकार के राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक यहां केवल गाय के ही चराने की व्यवस्था हो सकती है। इस जगह भेड़, ऊंट आदि जानवारों के आने पर रोक है। इस जमीन पर धीरे धीरे भूमाफियाओं ने अपना कब्जा जमाना शुरु कर दिया था इसलिए पर्यावरण प्रेमी बृजनारायण किराडू ने इसकी सुरक्षा का जिम्मा उठाया और अपना पूरा जीवन इस जमीन की सुरक्षा करने में गुजार दिया है। उन्हें इसके लिए कई पीडाओं का भी सामना करना पड़ा है। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने के अलावा यहां अवैध कॉलोनी काटने जैसे कई जमीनी विवादों से भी गुजरना पड़ा है।

कैसे जुटा इस जमीन की सुरक्षा के लिए धन-

बीकानेर में इस जमीन पर कई जगह कब्जा होने लगा था और इससे चिंतित पर्यावरण प्रेमी बृजनारायण किराडू ने पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी से मुलाकात की। देवीसिंह ने उनसे कहा की दीवार के अलावा इस जगह को सुरक्षित करने के लिए उनके पास अन्य कोइ विकल्प नहीं है। इसके लिए भाटी ने अपने सहयोगियों और समर्थकों से सहयोग की अपील की और 40 किलोमीटर लंबी इस दीवार को बनाने के लिए 50 लाख रुपए बेहद कम समय में एकत्रित करवा दिए। अब किराड़ू को उम्मीद है कि जनता इसे बनाने में आने वाला पांच करोड़ का पूरा खर्च वहन कर लेगी क्योंकि दीवार बनाने का कार्य शुरु हो चुका है।

राजस्थान में पहले से ही एक 36 किलोमीटर लंबी दीवार है-

राजस्थान के कुंभलगढ़ में पहले से ही एक 36 किलोमीटर लंबी दीवार है, इसे 'ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' के नाम से भी जाना जाता है। चीन की ग्रेट वाल ऑफ चाइना के बाद दुनिया में इसका दूसरा स्थान है। ये दीवार देश की धरोहर है और इसका निर्माण महाराणा कुम्भा में 15 वीं शताब्दी में कराया था।

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(ये खबर स्थानीय अखबार दैनिक भास्कर में आई रिपोर्ट पर आधारित है)

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