अब चीनी कंपनी VIVO नहीं होगी IPL की स्पॉन्सर? BCCI ने कही ये बात

अरुण धूमल (Arun Dhumal) ने कहा कि Vivo के साथ करार अभी के लिए बना रहेगा, लेकिन BCCI इसे समाप्त करने में संकोच नहीं करेगा। अगर सरकार उन्हें ऐसा करने के लिए कहती है, तो बोर्ड विवो के साथ सभी कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर सकता है।

Updated On: Jun 19, 2020 12:07 IST

Dastak Web

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल (Arun Dhumal) ने बताया कि बीसीसीआई भविष्य में किसी भी चीनी कंपनी को स्टेडियम या अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए अनुबंध नहीं देगा। बता दें चीनी कम्युनिकेशन कंपनी Vivo इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2020) का शीर्षक प्रायोजक है। वहीं Li-Ning भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के लिए एक परिधान प्रायोजक (Apparel Sponsor) है, और दोनों संगठनों ने भविष्य में कभी भी इन अनुबंधों को समाप्त करने की बात से इनकार नहीं किया है। हालांकि, विवो अभी आईपीएल का टाइटल स्पॉन्सर बना रहेगा। बता दें, चीन के साथ हुई झड़प भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद भारत में चीन के खिलाफ काफी आक्रोश है और चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की मांग लगातार उठ रही है।

सरकार के आदेश पर बीसीसीआई खत्म कर सकता है कॉन्ट्रैक्ट-

अरुण धूमल ने कहा कि वीवो के साथ करार अभी के लिए रहेगा, लेकिन बीसीसीआई इसे समाप्त करने में संकोच नहीं करेगा, अगर सरकार उन्हें ऐसा करने के लिए कहती है, तो बोर्ड विवो के साथ सभी कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अरुण धूमल ने बताया कि भविष्य में, हम चीनी कंपनियों को अपना बीसीसीआई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए कोई अनुबंध नहीं देंगे। बता दें गालवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन और भारत के बीच फेसऑफ के बाद यह कदम उठाए जा रहे हैं। जिसमें 20 भारतीय सेना के 20 जवान चीनी सैनिकों के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए।

अगर सरकार चीनी उत्पादों पर पर प्रतिबन्ध लगती है, तो हम उसका पालन करेंगे- धूमल

हालांकि, बीसीसीआई ने अभी तक विवो प्रायोजन के मुद्दे पर चर्चा नहीं की है, लेकिन अगर चीनी कंपनियों के साथ प्रायोजकों के रूप में अलग-थलग करने के संबंध में सरकार की सलाह या आदेश देती है, तो बोर्ड इस अनुबंध को समाप्त करने में संकोच नहीं करेगा। धूमल ने कहा कि इसके बारे में कोई दो तरीके नहीं हैं, अगर सरकार चीनी उत्पादों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला करती है, तो बीसीसीआई इसका पालन करने में खुश होगी। उन्होंने यह भी कहा कि बीसीसीआई अनुबंध चक्र समाप्त होने पर भविष्य में भारत के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखेगा। उन्होंने कहा एक भारतीय के रूप में, मैं चीन को सबक सिखाने के लिए प्रतिबंध हूं। हमारे लिए देश पहले है।

स्पॉन्सरशिप को सही दृष्टिकोण से देखने की जरूरत-

बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष धूमल ने कहा कि वीवो के आईपीएल प्रायोजन को सही दृष्टिकोण में देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें चीनी कंपनियों के समर्थन और चीन के हितों का समर्थन करने के बीच अंतर को समझना होगा। क्योंकि, हम एक चीनी कंपनी से पैसा ले रहे हैं, बल्कि ऐसा नहीं है कि हम किसी चीनी कंपनी को पैसा दे रहे हैं। आपको बता दें कि वीवो ने 2018 में सौदे के रूप में 2,199 करोड़ रुपए में आईपीएल का खिताब पांच साल के लिए प्रायोजित किया है।

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42 फीसद पैसा टैक्स के रूप में सरकार को जाता है-

इसपर धूमल ने कहा कि 42 फीसदी पैसा करों के रूप में भारत सरकार को जाता है। इसलिए एक तरह से हम भारतीय हितों की मदद कर रहे हैं। उस पैसे को यहां रखा जा रहा है। साथ ही यह भारतीय क्रिकेट को मदद कर रहा है और जो पैसा भारत सरकार को जाता है वह भारतीय हितों की मदद कर रहा है। उन्होंने कहा।चीनी कंपनियां अपने फोन बेचते हैं और भारतीय उपभोक्ताओं से पैसा इकट्ठा करते हैं, और अगर मैं उस पैसे को नहीं लेता हूं, तो वह पैसा चीन में वापस चला जाएगा। इसलिए, इसे समझने की जरूरत है।

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