एंटी-भ्रष्टाचार की तरह युवाओं को एंटी-नस्लवाद के बारे में शिक्षित करने की जरुरत- डैरेन सेमी

वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान डैरेन सेमी (Daren Sammy) ने हाल में कहा कि युवाओं को नस्लवाद (Racism) के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है, उसी तरह जैसे हम एंटी-डोपिंग या भ्रष्टाचार-विरोधी पर जोर देते हैं।

Updated On: Jun 22, 2020 11:20 IST

Dastak Web

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अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत के बाद दुनिया भर में नस्लवाद (Racism) के रूप में हो रहे भेदभाव के खिलाफ हो रही बहस को एक बार हवा मिली है। ऐसे में वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान डैरेन सेमी (Daren Sammy) ने हाल में कहा कि युवाओं को नस्लवाद के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है, उसी तरह जैसे हम एंटी-डोपिंग या भ्रष्टाचार-विरोधी पर जोर देते हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की ऑनलाइन सीरीज़ इनसाइड आउट (Inside Out) के लेटेस्ट एडिशन में, खिलाड़ियों ने खेल की विविधता, खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों और क्रिकेट कम्युनिटी नस्लवाद के खिलाफ पूरी तरह से प्रतिबद्ध होने के लिए क्या कर सकती है, पर चर्चा की।

युवा खिलाडियों को शिक्षित करने की आवश्यकता-

डैरेन सेमी ने कहा कि एक व्यवस्थित स्तर पर शिक्षा की आवश्यकता है। जिस तरह डोपिंग रोधी या भ्रष्टाचार विरोधी शिक्षा पर जोर दिया जाता है, ठीक उसी तरह युवाओं को भी नस्लवाद पर शिक्षित करने के लिए जोर दिया जाना चाहिए ताकि युवा क्रिकेटरों को क्रिकेट में विविधता को समझने में मदद मिल सके और जल्दी से जल्दी उसे अपना सकें।

वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज और ब्रॉडकास्टर इयान बिशप द्वारा संचालित इंटरव्यू, इनसाइड में उन्होंने क्रिकेट में विविधता और नस्लवाद को लेकर वेस्टइंडीज से दो बार के आईसीसी पुरुष टी-20 विश्व कप विजेता टीम के कप्तान डैरेन सेमी, इंग्लैंड से पूर्व आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप और टी-20 विश्व कप विजेता और ब्रॉडकास्टर ईसा गुहा, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व ऑलराउंडर जेपी डुमिनी, ऑस्ट्रेलिया के साथ दो बार के आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप विजेता और प्रमुख कोच टोम मूडी और पूर्व पाकिस्तान खिलाड़ी और ब्रॉडकास्टर बाजिद खान के साथ चर्चा की।

क्रिकेट सभी धर्मो और नस्लवाद को पार करता है- ईसा गुहा

ईसा गुहा ने कहा कि हमारे पास क्रिकेट के साथ एक वास्तविक अवसर है क्योंकि यह विभिन्न नस्लों, पृष्ठभूमि और धर्मों को पार करता है और इन सभी को अलग-अलग लोगों को एक साथ लाता है। यह वास्तव में एक ऐसा खेल है जो सभी को एकजुट करता है। मेरा मतलब है, इंग्लैंड की मौजूदा पुरुष टीम को देखें। हम इस टीम पर बहुत ज्यादा फिदा हैं, जो इतनी विविधतापूर्ण है। लेकिन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात प्रतिनिधित्व है।

मुझे इंग्लैंड की टीम पर गर्व है- ईसा

उन्होंने आगे कहा यह टीम यूके का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग, काले समुदाय के लोग इन लोगों को देख सकते हैं और कह सकते हैं, वे ऐसा करने में कामयाब रहे हैं, तो क्या मैं ऐसा कर सकता हूं। दूसरी बात जिस पर मुझे गर्व है, वह है इस टीम का इरादा, जो एक दूसरे की संस्कृतियों के बारे में बहुत कुछ जानने के लिए रखते हैं। मेरे लिए यह उनकी सफलता का कारण है। यह हमारे लिए समान था, जब मैं और एबोनी (एबोनी रेनफोर्ड-ब्रेंट) 2009 के आईसीसी विश्व कप में थे।

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वहीं, हर एक पैनलिस्ट ने इस विषय पर अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया और उन समाधानों की बात की जो खेल के भीतर अधिक समान जगह बनाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर सर्व सम्मति से सहमति जताई कि खेल में अंतर लाने के लिए कई स्तरों पर अधिक बातचीत और अधिक स्वामित्व की आवश्यकता है।

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