चीनी कंपनियों के साथ हुए करार पर आईपीएल करेगी बैठक, रद्द हो सकती है करोड़ों की डील

भारत और चीन के बीच गालवान घाटी में गतिरोध के बाद चीनी सैनिकों द्वारा 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। जिसके कारण चीनी उत्पादों और सेवाओं का बहिष्कार करने के लिए देशव्यापी आंदोलन शुरू हो गया है।

Updated On: Jun 20, 2020 11:44 IST

Dastak Web

Photo Source: IPL

भारत और चीन के बीच गालवान घाटी में हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए। जिसके परिणामस्वरूप चीनी उत्पादों और सेवाओं का बहिष्कार करने के लिए एक देशव्यापी आंदोलन शुरू हो गया है। हालांकि कई व्यवसायों ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार किया है। ऐसे में इंडियन प्रीमियर लीग गवर्निंग काउंसिल (IPL GC) सीमा पर मौजूदा स्थिति के बीच चीनी कम्पनियों के साथ हुए करार पर एक बार फिर से समीक्षा करना चाहती है। जिसको लेकर अगले हफ़्ते आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने बैठक बुलाई है।

चीनी कंपनियों के साथ हुए डील के भविष्य पर अगले हफ़्ते होगी बैठक-

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पास ऐसे कई स्पॉन्सर हैं, किसी न किसी रूप में चीन से जुड़े हुए हैं। ऐसे में बीसीसीआई चीनी कम्पनियों के साथ हुए करार की समीक्षा करना चाहती है। यही कारण है कि आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल चीनी कंपनियों के साथ हुए मौजूदा करार पर अगले हफ़्ते बैठक आयोजित करेगी। जिसकी जानकारी खुद आईपीएल ने दी।आईपीएल ने ट्वीट करते हुए लिखा सीमा पर होने वाले झगड़े को ध्यान में रखते हुए, हमारे बहादुर जवानों की शहादत के कारण, आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने आईपीएल के विभिन्न स्पॉन्सरशिप सौदों की समीक्षा के लिए अगले सप्ताह एक बैठक बुलाई है।

विवो ने 2200 करोड़ में खरीदा आईपीएल का टाइटल-

बीसीसीआई ने 2200 करोड़ रूपए में चीनी कम्पनी वीवो के साथ पांच साल तक के लिए करारा किया है। जहां आईपीएल को टाइटल स्पॉन्सर के रूप में वीवो हर साल 440 करोड़ रुपए देता है। यह सौदा 2020 तक के किया गया है। हालांकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के कोषाध्यक्ष ने वर्तमान प्रायोजन समझौते के साथ किसी भी तरह के बदलाव से इनकार कर दिया था। लेकिन कुछ दिनों पहले, देश भर में बढ़ती चीन विरोधी भावनाओं के कारण आईपीएल को चीनी कम्पनियों के साथ हुए करार को लेकर और गंभीर नोट में डाल दिया है।

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भारत और चीन के हितों को अलग अलग करके देखना होगा- धूमल

बीसीसीआइ के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने इससे पहले कहा था कि वीवो के साथ हुए स्पॉन्सरशिप डील भारत के हितों की मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमें चीनी कंपनियों के हितों और चीन के हितों के बीच अंतर को समझना होगा क्योंकि हम एक चीनी कंपनी से पैसा ले रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम चीनी कम्पनियों को पैसा दे रहे हैं। इसलिए हमें भारत और चीन के हितों को अलग अलग करके देखना होगा। उन्होंने कहा चीन से जो भी पैसा आता है, उसका 42 प्रतिशत पैसा टैक्स के रूप में भारतीय सरकार को जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि हम चीनी कम्पनियों के साथ करार खत्म नहीं कर सकते।

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