फेसबुक के 533 मिलियन यूजरों का निजी डाटा खुले में उपलब्ध, कंपनी ने साधी चुप्पी

फेसबुक (Facebook) पर आपका डाटा (Data) सुरक्षित नहीं है, इस सच को आपको अब हजम कर ही लेना चाहिए। क्योंकि 100 से अधिक देशों के 533 मिलियन यूजरों का डाटा अब ऑनलाईन फ्री में उपलब्ध है। इसमें भारत के भी 6.1 मिलियन फेसबुक यूजरों का डाटा शामिल है।

Updated On: Apr 4, 2021 11:28 IST

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फेसबुक (Facebook) पर आपका डाटा (Data) सुरक्षित नहीं है, इस सच को आपको अब हजम कर ही लेना चाहिए। क्योंकि 100 से अधिक देशों के 533 मिलियन यूजरों का डाटा अब ऑनलाईन फ्री में उपलब्ध है। इसमें भारत के भी 6.1 मिलियन फेसबुक यूजरों का डाटा शामिल है। इससे पता चलता है कि ऑनलाईन प्रिवेसी की बातें महज एक ढकोसला है। बहुत सारी हैकिंग वेबसाइटों पर आपका डाटा अब मुफ्त में उपलब्ध है। जिसमें आपका नाम, लिंग, व्यवसाय, शादी और रिलेशनशिप की स्थिति, फेसबुक पर शामिल होने की तिथी और आपका काम करने का स्थान आदि शामिल है।

सबसे पहले 2019 में लीक हुआ था ये डाटा-

अंग्रेजी अखबर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस डेटाबेस को सबसे पहले 2019 में लीक किया गया था। शुरू में इसे प्रति संदेश $ 20 प्रति शुल्क के साथ मोबाईल एप्लीकेशन टेलिग्राम पर बेचा जा रहा था। फेसबुक ने तब कहा था कि उसने उस सेक्यूरिटी सिस्टम को अब सुधार लिया है जिसके कारण उसका डेटा लीक हुआ है। लेकिन जून 2020 में, और फिर जनवरी 2021 में, उसी डेटाबेस को फिर से लीक कर दिया गया था। साइबरसिटी फर्म हडसन रॉक के सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी, एलोन गैल ने इस मामले को सबसे पहले दुनिया के सामने रखा था।

इस रविवार को गैल ने फिर से फेसबुक के लीक हुए डेटाबेस का सबूत साझा किया और लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि उनका निजी डेटा फेसबुक पर कितना सुरक्षित है। गैल के अनुसार जिसके पास भी फेसबुक अकांउट है उसकी बहुत सी जानकारी ऑनलाईन लीक हो चुकी है ये हमें मान लेना चाहिए। नए डाटाबेस लीक के अनुसार अफगानिस्तान से 5.5 लाख , ऑस्ट्रेलिया से 1.2 मिलियन, बांग्लादेश से 3.8 मिलियन, ब्राजील से 8 मिलियन, और भारत से 6.1 मिलियन उपयोगकर्ताओं का डाटा कई वेबसाईटों पर मुफ्त में रखा गया था।

फेसबुक ने मामले पर साधी चुप्पी-

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो उन्होंने इस सबंध ने फेसबुक को कईं मेल भेजे हैं वे इस मुद्दे पर फेसबुक का जवाब जानना चाहते थे लेकिन फेसबुक ने एक भी जवाब उनके ईमेल का नहीं दिया है। अखबार ने अपने स्तर पर डाटा की जांच की है जिसमें वो काफी हद तक सही पाया गया है।

मोबिक्विक का डाटा भी खुले में बिक रहा था-

यह भारत में 10 दिनों के भीतर दूसरा ऐसा उदाहरण है जहां किसी कंपनी के उपयोगकर्ताओं का डेटाबेस लीक होने का दावा फिर से किया गया है। इसस पहले बीते सप्ताह की शुरुआत में मंगलवार को गुड़गांव स्थित मोबाइल भुगतान और डिजिटल वॉलेट कंपनी मोबिक्विक (MobiKwik) के 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं का डाटा कथित रुप से लीक होने की खबर थी और उसे डार्कवेब पर भी बेचा जा रहा था।

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जैसा कि फेसबुक के डाटा के बारे में कहा जा रहा है ठीक उसी प्रकार मोबिक्विक का डाटा भी एक महीने से अधिक समय से पब्लिक डोमेन में था। लेकिन जब इस डेटाको डार्कवेब पर बिक्री के लिए पोस्ट किया गया तो ये मुद्दा सामने आया। बाद में डार्कवेब पर एक लिंक में सर्चबार दिया गया जिसका उपयोग कर कोई भी किसी भी यूजर्र का फोन नंबर, ईमेल एड्रेस और अन्य जानकारियां हासिल कर सकता है।

भारत में डाटा सुरक्षा को लेकर नहीं है कोई खास कानून-

आपको बता दें भारत में उसके नागरिकों के डाटा सुरक्षा संबधि कोई भी मजबूत तंत्र अभी तक विकसित नहीं किया गया है। इससे संबधित पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल साल 2019 से लोकसभा में लंबित पड़ा है।

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