Whatsapp ने भारत सरकार के नए आईटी नियमों के खिलाफ किया कोर्ट का रुख, बताया निजता का हनन

Whatsapp ने भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी याचिका दाखिल की है और सरकार द्वारा लागू नए नियमों को निजता का उल्लंघन करार दिया है।

Updated On: May 26, 2021 11:14 IST

Ajay Chaudhary

Photo Source- Pixabay

Whatsapp ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मस के लिए भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है। नए नियम के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफार्म पर आई किसी भी जानकारी के पहले स्त्रोत के बारे में पता लगाने का प्रवधान करना है। फेसबुक से स्वामित्व वाली व्हाट्सएप ने सरकार के नए नियमों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। व्हाट्सएप ने ये याचिका 25 मई को दिल्ली उच्च नयायालय में दाखिल की है। व्हाट्सएप के अनुसार उसके उपयोगकर्ता की गोपिनियता उसके लिए महत्वपूर्ण है।

व्हाट्सएप ने कहा ये निजता के मौलिक अधिकारों का हनन-

व्हाट्सएप ने अपनी याचिका में 2017 का जस्टिस के एस पुट्टास्वामी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस का हवाला दिया है। व्हाट्सएप के अनुसार किसी को ट्रेस करना असंवैधानिक है और ये लोगों के निजता के मौलिक अधिकार का हनन करता है, ये अधिकार सुप्रीम कोर्ट के फैसला भी रेखांकित करता है। कंपनी ने ट्रेसेबिलिटी को असंवैधानिक करार देने की मांग की है, ताकि इन नियमों को लागू करने से रोका जा सके। साथ ही कंपनी ने अनुरोध किया है कि इस नियम के लागू न होने से उसके कर्मचारियों के खिलाफ अपराधिक मुकदमों को भी रोकने पर विचार हो।

चैट ट्रेस करना हर मैसेज का फिंगरप्रिंट रखने जैसा-

व्हाट्सएप के एक प्रवक्ता ने मीडिया को जानकारी दी है कि मैसजिंग एप्स की चैट को ट्रेस करने के मायने व्हाट्सएप की हर चैट पर फिंगरप्रिट रखने जैसा है। जिससे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन टूट जाएगा और ये लोगों की निजता के मौलिक अधिकार को कमजोर बना देगा। हम लगातार दुनिया भर में सिविल सोसाइटी और विशेषज्ञों के साथ काम कर रहे हैं और उन चीजों का विरोध कर रहे हैं जो लोगों की गोपनीयता का उल्लंघन करती है। साथ ही हम लोगों की सुरक्षा को मध्यनजर रखते हुए भारत सरकार के साथ इसके व्यावाहारिक समाधानों पर लगातार बातचीत जारी रखेंगे।

कानून की वजह से अरबों संदेशों को रोजाना एकत्रित करना होगा-

व्हाट्सएप लगातार यह तर्क दे रहा है कि ट्रेसबिलिटी उसके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के खिलाफ है। जो यह पता लगाने से रोकता है कि संदेश कौन भेज रहा है। व्हाट्सएप के अनुसार ट्रेसबिलिटी निजी कंपनियों को अरबों संदेश रोज एकत्रित करने को मजबूर करेगा कि किसने किसे क्या कहा और किसने किसे क्या संदेश भेजा। सिर्फ एक कानून के लागू हो जाने की वजह से उन्हें ऐसा करना पड़ेगा।

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व्हाट्सएप के अनुसार ये पता लगाना बेहद मुश्किल है कि कोई मैसेज कहां से पहली बार चला है। बहुत से यूजर वेबसाइट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मस पर आए संदेशों को कॉपी पेस्ट करते रहते हैं। कंपनी के अनुसार ट्रेसेबिलिटी इस तरह भी लागू नहीं की जा सकती जिससे डाटा के साथ बडे स्तर पर छेडछाड हो सके और ये प्लेटफार्मस बेहद कम सुरक्षित हो जांए।

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