क्या है ताजमहल के प्रदूषण का मसला, क्यों गुस्से में है सुप्रीम कोर्ट

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taj mahal polluted
Taj Mahal (Photo Source- Google)

सुप्रीम कोर्ट ने बीते बुधवार यानी की 11 जुलाई 2018 को कहा कि या तो आप ताजमहल को संरक्षण दें  या फिर उसे बंद कर दें या फिर उसे जमींदोज कर दें। यानी की मिट्टी में मिला दें। हम सब के मन में ये सवाल है कि आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट को इतनी सख्त टिप्पणी करने की जरुरत पडी। क्या बात हाथ से इतनी निकल गई थी जो सुप्रीम कोर्ट को यहां तक कहना पडा कि इसका अस्तित्व ही मिटा दो। चलिए हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्या हुआ कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर इतना सख्त नजर आया।

सबसे पहले विस्तार से जान लेते हैं क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने-

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि या तो आप ताज को संरक्षण दो या फिर बंद और जमींदोज कर दो। कोर्ट ने कहा कि पैरिस की एफिल टावर को देखने हर साल दुनिया भर से आठ करोड लोग आते हैं लेकिन ताजमहल को देखने 50 लाख लोग ही साल भर में आते हैं। जबकी हमारा ताज ज्यादा खूबसूरत है। लेकिन आप ताजमहल और यहां आने वाले टूरिस्टों को लेकर गंभीर नहीं है। ताजमहल को लेकर घोर उदासीनता देश का बडा नुकसान है। जाहिर है ये सुप्रीम कोर्ट की इस मुद्दे पर अब तक की सबसे सख्त टिपण्णी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर ताजमहल और यहां आने वाले पर्यटकों का ध्यान रखा जाता तो हमारी विदेशी मुद्रा की दिक्कत भी काफी हद तक दूर हो जाती। सुप्रीम कोर्ट ने फिर सवाल उठाया कि टीटीजेड (ताज ट्रैपेज़ियम जोन) एरिया में उद्योग लगाने के लिए लोग आवेदन कर रहे हैं और उनके आवेदन पर विचार हो रहा है। ये आदेशों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पीएचडी चेंबर्स को कहा कि जो इंड्रस्‍टी चल रही है उसको क्यों ना आप खुद बंद करें। तब टीटीजेड की तरफ से कहा गया कि वो अब टीटीजेड में कोई नई फैक्ट्री खोलने की इजाजत नहीं देंगे।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि टीटीजेड ने कुछ नई फैक्ट्रियों के आवेदन पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड के चेयरमैन को नॉटिस जारी किया। टीटीजेड के प्रमुख को सुप्रीम कोर्ट में तलब किया।

अब जान लेते हैं क्या है ये टीटीजेड जिससे सुप्रीम कोर्ट इतना नाराज है-

टीटीजेड यानी ‘ताज ट्रैपेजियम जोन’ ताजमहल के आसपास का 10,400 स्कवायर किलोमीटर का एक दायरा है। जिसे ताजमहल को प्रदूषण से संरक्षण देने के लिए निर्धारित किया गया है। दिसंबर 30 सन् 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल पर प्रदूषण से पड रहे दुष्प्रभाव पर दाखिल एक याचिका का निपटारा करते हुए इस जोन में इंडस्ट्रीयों को बंद करने का आदेश दिया था। ताजमहल के आसपास कोयले और नेचुरेल गैस का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को बंद करने या फिर वहां से शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था। इसके लिए एक अथॉरिटी भी बनाई गई जिसका नाम The Taj Trapezium Authority(TTZ) रखा गया।

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टीटीजेड का एरिया आगरा से लेकर फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस, ऐटा और राजस्थान के भरतपुर तक फैला है।

केंद्र ने क्या जवाब दिया सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी पर-

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि MOEF ने एक कमिटी का गठन किया है, जो ये देखेगी कि ताजमहल कितना और किन वजहों से प्रदूषित हुआ है। केंद्र सरकार ने ये भी कहा कि ये कमिटी प्रदूषण को लेकर ताजमहल के आस पास के इलाकों का भी मुआयना करेगी। केंद्र ने कहा है कि कमेटी की रिपोर्ट चार माह के भीतर आ जाएगी तब ये भी देखा जाएगा कि क्या किसी विदेशी एक्सपर्ट को कमिटी में शामिल करने की जरूरत है या नहीं।

 पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के जवाब से ही ज्यादा गुस्से में आया सुप्रीम कोर्ट-

दरअसल 10 मई 2018 को ही पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वकील एडीएन ने ताज के पीले व हरे होने के कारणों को पेश करते हुए कोर्ट में कहा था कि ताजमहल आने वाले पर्यटकों की जुराबे गंदी होने से फर्श को नुकसान होता है। पुरातत्व विभाग ने सबसे बचकानी बात ये कही थी कि यमुना में भारी मात्रा में काई है जिससे ताज का रंग हरा हो रहा है। इस पर जस्टिस लोकर ने कहा था कि क्या काई के पंख लग गए हैं, जो वो उड़कर ताजमहल पर चिपक रही है। एएसआई यानी भारतीय पुरातत्व विभाग के इस जवाब से सुप्रीम कोर्ट का पारा काफी चढा हुआ है। क्योंकि कोर्ट के अनुसार कोई भी ताजमहल पर प्रदूषण के प्रभाव को लेकर गंभीर नहीं है इसलिए ही इस तरह की बातें सामने आ रही हैं जो समस्या के असल मुद्दे से कोसो दूर है। कोर्ट ने केंद्र को यहां तक कह दिया है कि यदी आपको ताज को बचाना है तो आपको एएसआई का कोई विकल्प तलाशना होगा।

क्या है ताजमहल के रंग खराब होने का असल कारण-

हम ये तो नहीं कहते कि ताजमहल का रंग खराब होने का असल कारण यही है जो नीचे लिखा है लेकिन बीबीसी में छपी एक खबर के अनुसार आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी का कहना है कि ताजमहल के रंग खराब होने का कारण पार्टिकुलेट मैटर है। जिससे दिल्ली और गंगा के मैदानी भागों में स्थित तमाम दूसरे शहर भी जूझ रहे हैं। इसके अलावा कूड़ा जलाए जाने की वजह से जो धुआं और राख हवा में उड़ती है, वह उड़कर ताजमहल पर जाकर बैठ जाती है जिससे उसके रंग में अंतर आता है।”

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वहीं, सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट से जुड़ी शांभवी शुक्ला ने ताजमहल को होने वाले नुकसान की दूसरी वजहों की ओर इशारा किया है।शांभवी शुक्ला ने बीबीसी को बताया कि, “साल 2013 में भी ऐसी ख़बरें आई थीं कि ताजमहल के रंग में पीलापन आ रहा है, अब उसके रंग में हरापन आने की बात की जा रही है। अगर इसकी वजहों की बात करें तो आगरा में नगर निगम का सॉलिड वेस्ट जलाया जाना एक मुख्य वजह है। इसके साथ ही ताजमहल के आसपास काफ़ी बड़ी संख्या में इंडस्ट्रीज़ भी हैं। इसके अलावा जब दिल्ली से पुरानी गाड़ियों को प्रतिबंधित किया जाता है तो ये गाड़ियां इन शहरों में ही पहुंचती हैं जिनकी वजह से आगरा के वायू प्रदूषण का स्तर काफ़ी बढ़ा हुआ है।”

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