नेशनल होम

अनिश्चितकालीन उपवास पर चल रहे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल का निधन

गंगा नदी की सफाई की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन उपवास पर चल रहे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल का गुरुवार को ऋषिकेश में  दिल का दौरा आने से निधन हो गया। 87 वर्षीय अग्रवाल 15 जून से उपवास पर थे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के प्रोफेसर रह चुके अग्रवाल गंगा की सफाई के लिए हो रहे अप्रभावी प्रयासों से नाखुश थे। इसके अलावा, अग्रवाल गंगा पर बांधों / बैराज / सुरंगों के चल रहे निर्माण के भी खिलाफ थे। उनका कहना था कि ये नदी के पानी के प्राकृतिक प्रवाह और गुणवत्ता को पूरी तरह नष्ट कर देंगे।

जीडी अग्रवाल, 87 वर्ष के थे और बाद में एक साधक बन गए थे और उन्हें स्वामी ज्ञान स्वरुप सानन के रूप में जाना जाता था। एनडीटीवी के अनुसार, उन्हें 109 दिनों के लिए उपवास के बाद बुधवार को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कर दिया गया था। उत्तराखंड में लोहरिनग पाला जलविद्युत परियोजना के खिलाफ विरोध करने के लिए वो तीन बार भूख हड़ताल पर जा चुके थे। इस परियाजना को बाद में बंद कर दिया गया।

उन्होने गंगा को फिर से जीवंत करने के लिए प्रधानमंत्री और  मंत्रियों को कई पत्र लिख चुके थे। वह चाहते थे कि सरकार गंगा और इसकी सहायक नदियों पर चल रहे सभी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण को रोक दे। उनका मानना था कि यदि यह बिल संसद द्वारा पास कर दिया जाता है तो गंगाजी की अधिकांश समस्याओं का समाधान हो जाएगा। उन्होने कहा था कि ”जिस दिन यह पारित हो जाता है, मैं अपना उपवास तोड़ दूंगा। यह मेरी आखिरी ज़िम्मेदारी है। यदि वे अगले सत्र में पारित मसौदे से पहले इसे पारित करने में सक्षम हैं तो अच्छी बात है। यदि ऐसा नहीं होता है तो बहुत से लोग दुखी मर जाते हैं। भविष्य पीढ़ी के लिए अब पवित्र नदी की ज़िम्मेदारी लेने का समय है।”

 उनकी मौत, गंगा और इसकी सहायक नदियों को बचाने के लिए चल रहे आंदोलन को एक बड़ा झटका है। प्रोफेसर अग्रवाल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव के रूप में कार्य किया था। उन्होने भारत में पर्यावरण कानून को बनाने में एक अहम योगदान दिया था।

dastak
Dastak India Editorial Team
http://dastakindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *