सबरीमाला मंदिर मामला: महिला प्रवेश हिंसकों को किया गिरफ़्तार, कानून नियमानुसार उठाएंगे कदम

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Sabrimala temple, Kerala, DGP loknath behera
Photo : Google

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश फैसले को हरी झंडी दे दी थी। लेकिन फिर भी इस फैसले का काफी विरोध हुआ। महिलाओं ने ही जगह-जगह पैदल मार्च निकाले और हिंसा प्रवति को अपनाते हुए महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया था।

महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ हुई हिंसा के चलते केरल पुलिस ने कुल 2061 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। और राज्य भर में 452 मामले पंजीकृत किये है।

केरल पुलिस के डीजीपी लोकनाथ बेहरा के मुताबिक अशांति फैला रहे कई और लोगों की पहचान की जा चुकी है। साथ ही, उन्होंने बताया कि कानून के नजरिये से जो सही होगा वो कदम उठाया जाएगा। यदि इससे भी ज्यादा लोग गिरफ्तार करने पड़े तो ये वो भी करेंगें।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई महिला पत्रकारों और भक्त महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने नहीं दिया गया था। बीते सोमवार को सबरीमाला मंदिर के दरवाजे एक महीने के लिए बंद हो चुके हैं। इतना ही नहीं, जिसके बाद ये मामला फिर से सुप्रीम तक पंहुचा था। कई नेताओं ने इस मामले को राजनीति मोड़ दिया तो कई ने इस पर ऐसे विवादित बयान दिए। जिसने सोशल मीडिया पर हडकंप मचा दिया।

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क्या था मामला

केरल के सबरीमाला मंदिर में अब तक 10-50 साल की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत नहीं थी। क्योंकि वहां के लोगों का मानना था कि इस उम्र की महिलाएं मासिक धर्म से होती है तो उन्हें मंदिर में जाने न दिया जाये। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को इसे असंवैधानिक करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि धर्म एक गरिमा और पहचान है। मंदिर में महिलाओं को भी पूजा करने का पूरा अधिकार है। ये सबका मौलिक अधिकार है। और सबरीमाला की पंरपरा को धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं माना जा सकता। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबरीमाला की परंपरा असंवैधानिक है। महिलाओं को मासिक धर्म की आड़ में मंदिर से दूर रखना उनकी गरिमा के खिलाफ है। और मासिक धर्म के आधार पर महिलाओं को सामाजिक तौर से दूर रखना भी संविधान के खिलाफ है।

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