ए.एस.पी भाग्यश्री नवताके को ओपन लैटर

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यह ओपन लैटर मैं ए.एस.पी भाग्यश्री नवताके को लिख रही हूँ। उनकी एक विडियो में उन्होंने कहा है कि उन्होंने अपने पुलिस स्टेशन में 21 लोंगो के खिलाफ फर्जी केस दायर किए हैं। ऐसा उन्होंने उन दलितों के खिलाफ किया जो उनके पास SC/ST Atroctity act के  तहत कंपलेन करने आये थे। विडियों में वो यह भी कह रही हैं कि मुस्लिमों के खिलाफ 307 के झूठे केस लगाए ताकि उन्हें बेल ना मिल सके।

मुझे आपसे बहुत सहानूभूति है कि आप आइ.ए.स नहीं बन पाईं, पर सामाजिक सुधार करने के लिए आइ.पी.स में भी कम अवसर नहीं है। मन को बहुत ठेस लगी यह जानकर की कथित तौर पर आपने 21 मूल-निवासियों पर झूठे मुकदमे दायर किये। उनका कुसूर बस इतना था कि उन्होंने यह उम्मीद लगाई कि उन पर हो रहे अत्याचारों के लिए जो भी उचित कार्रवाई है वो आप करेंगे। उन्हें क्या मालूम था कि आपका व्यक्तित्व ऐसा है जिसमें आप इंसान को जाति, धर्म और क्षेत्रवाद के चश्में से देखती है।

सिविल सेवा परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए आपने इतिहास, राजनीती की किताबें तोते की तरह रट तो ली लेकिन समझ ना पाई। अगर पढी होती तो इतिहास आपको उन पर सदियों से हो रहे अन्याय का परिमाण जरूर दे देता। जब आप किसी व्यक्ति पर सिर्फ इसलिए अत्याचार कर रहे हो क्योंकि वह मुस्लिम है तो आप जिन्ना के उन्हीं शब्दों को सार्थक कर रही हो जिनमें जिन्ना ने कहा था कि धार्मिक अल्पसंख्यक कभी-भी हिन्दु बहुमत वाले राष्ट्र में सुरक्षित नहीं है।

इतिहास आपकों यह भी बताता है कि मराठों, राजपूतों, निजामों में बँटे इस धरती के टुकड़े को भारत का स्वरूप देने के लिए लाखों नें खुद को धूल में मिटा दिया। अब जब आप खुद को एक मराठा के तौर पर देखती हैं ओर ना कि एक भारतीय नागरिक के तौर पर तो आप उन लाखों लोगों के बलिदान की खिल्ली उड़ा रहीं हैं।

जब आप उन 21 लोंगों के हाथ पैर बाँधकर उनकी निर्ममता से पिटाई कर रहे थे तो आपको उनकी बेगुनाही नजर नहीं आई? आपको नहीं लगा कि आपके आइ,ए.स ना बनने का कारण वो नहीं थे। सच्चाई यह है कि 70 साल की आजादी के बाद भी आप 21 बेगुनाहों को बाँधकर उनकी पिटाई कर सकती हैं और फिर भी आपका सिर्फ तबादला हुआ। यही इस बात का उदाहरण है कि क्यों हमें एक सशक्त SC/ST Prevention Of Atrocities Act की जरूरत है।

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