ICNC 2019, मशीन लर्निंग, शोध, द इंटरनेशन कॉन्फ्रेंस ऑन न्यूक्लियर कार्डियोलॉजी एंड कार्डियक सीटी, मौत की तारीख, आर्टिफ‌िशियल इंटेल‌िजेंस
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आपकी मौत का दिन-तारीख बताएगी ये ‘मशीन’, शोध में दावा

हाल ही में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि एक ऐसा अप्लीकेशन तैयार हो गया है जो आर्टिफ‌िशियल इंटेल‌िजेंस की सहायता इंसान की मौत का दिन-तारीख बता देगा। इसका नाम मशीन लर्निंग है। शोध का दावा है कि मशीन द्वारा बताए गए समय में करीब 90 फीसदी तक सच्चाई है।

इसे ऐसे समझिए कि अगर मशीन ने किसी शख्स की मौत की डेट किसी महीने की 10 तारीख को बताता है तो उनका अंतिम ‌दिन नौ या 11 तारीख हो सकता है। मशीन के ऊपर किए किए अध्ययन पत्र को द इंटरनेशन कॉन्फ्रेंस ऑन न्यूक्लियर कार्डियोलॉजी एंड कार्डियक सीटी (ICNC) 2019 में प्रस्तुत किया गया। यहां मौजूद दुनिया के बड़े-बड़े डॉक्टरों ने इस मशीन की विश्वनीयता पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया।

हार्ट अटैक आने का दिन-तारीख भी बताएगी मशीन

इस मशीन की खासियत ये है कि यह केवल मौत पर ही भविष्यवाणी नहीं करती बल्कि ये भी बता सकती है कि आपको हार्ट-अटैक कब आ सकता है।

मशीन को कैसे चलता है पता

यह मशीन बेहद गणितीय नियमों पर आधारित है। यह किसी शख्‍सियत की महीन से महीने जानकारी अपने पास रखती है और उसके विश्लेषण के आधार पर अपनी भविष्यवाणियां करती है। असल में आप ऐसी मशीनों से लगातार घिरे हुए हैं और अपने डाटा उन्हें दे रहे हैं। चाहे वो आपके गूगल सर्च हों, चाहे फोन पर फेस रिकग्निशन, खुद से चलने वाली कार या नेटफ्लिक्स को दी गई जानकारियां, ये मशीनें एक-एक यूजर की जानकारियां रखने के बाद उन्हें अपने हिसाब चीजें दिखानी शुरू कर दे रही हैं। इसका सीधा आशय है आप अंदाजा लगाए जाने योग्‍य हैं।

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कैसे हुआ ये शोध

असल में हाल ही में 950 मरीजों के ऊपर उनके जीवन से जुड़ी 85 चीजों के ऊपर शोध किया गया। इसके बाद उनके साथ करीब छह सालों तक काम करने के बाद एक एल्गोरिथम बनाया गया। इस एग्लोरिथ्म में एक खास बात सामने आई। उन मरीजों में कई ऐसी बातें थी जिनके बारे में पहले ही बताया जा सकता था। इनमें सबसे खास बात उनकी मृत्यू और उनके आने वाले हार्ट अटैक की डेट थी।

फिनलैंड के टुर्कू पीईटी सेंटर डॉ. लुइस एडुराल्डो जुअरेज ओर्जोको ने इस स्टडी को लिखा है। उन्होंने बताया, “हमारे पास बहुत से डाटा उपलब्‍ध होता है। लेकिन हम उनकी उस तरह से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। इसलिए हमने इस विचार पर काम किया। यह मशीन दूसरी तकनीकों से एक कदम और आगे जाकर डाटा एनॉसिस करती है।”

उनके अनुसार, “डॉक्टर आपके इलाज के लिए भी अपने अनुभव के आधार पर एक तरह का जोखिम उठाते हुए आपको कुछ दवाइयां देता है। उसे विश्वास होता है कि आमुक लक्षण हैं तो आमुक दवा काम करेगी। लेकिन यह मशीन पूरी तरह से साफ दिखने वाले डाटा पर आधारित होगी।”

उन्होंने यह भी कि ‌मौत और हार्ट अटैक पहले से बताने के लिए डाटा को बहुत गराई से परखना होता है। यह इंसानी रिसोर्स से नहीं हो पाएगा। ऐसे डेटा को समझने में काफी कठिनाई आती है। लेकिन छह सालों में इसे पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है।

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