सीमा पर शहीद हुए वीरों की पत्नीयों की सच्ची कहानी पर आधारित है फिल्म “सैल्यूट”

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फिल्म सैल्यूट का पोस्टर

भूपेंद्र चौधरी

इस दिवाली 8 नवंबर को हरीश अरोडा के निर्देशन में बनी पंजाबी फिल्म “सैल्यूट” धूम मचाने रुपहले पर्दे पर आ रही है। ये फिल्म जंग में शहिद हुए सेना के जवानों की युवा पत्नीयों की जिंदगी की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में बताया गया है कि कैसे इन वीरांगनाओं को सलाम करने की जगह निशाना बनाया गया, कैसे इनपर इनके ही रिश्तेदारों और समाज ने यौन हमले बोले। फिल्म में ये भी दिखाया गया है कि कैसे इन विरांगनाओं को इनके पति की मौत पर मिलने वाली राशी के नाम पर भावनात्मक रुप से ब्लैकमेल किया जाता है।

फिल्म के निर्माता निर्देशक हरीश अरोडा फिल्म में ब्रिगेडियर का रोल निभा रहे हैं। हरीश हरियाणा के झज्जर जिले के दुजाना गांव के हैं। इन्होंने इससे पहले जर-जोरु और जमीन फिल्म बनाई थी जो सुपरहिट रही थी। हरीश फिल्म सैल्यूट के बारे में बताते हैं कि इन विधवाओं की स्थिती और मजबूरी को समझने कोई भी सामने नहीं आता है। हमने इस फीचर फिल्म के जरिए देश, समाज और परिवार के प्रति प्यार का मजबूत संदेश देना चाहते हैं। ये वीर नारी और इनके बच्चे समाज से प्यार और सम्मान के हकदार हैं।

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इस फिल्म में नव बजवा और जसपिंदर चीमा मुख्य भूमिका में है। नव बजवा फिल्म में कर्मबीर की भूमिका निभा रहे हैं। कर्मबीर हरियाणा से बॉक्सिंग चैंपियन हैं और सैन्य परिवार से संबधित हैं। कर्मबीर के पिता कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। इनकी विधवा मां को काफी दिक्कतों का सामना करना पडा। बाद में कर्मबीर भारतीय सेना की जाट रजिमेंट में लेफ्टीनेंट चुन लिए जाते हैं।

वहीं भारती पंजाब से बॉक्सिंग में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। भारती बचपन में ही अपने माता-पिता को खो देती है। जिन्हें उनके बहनोई और ननंद ने अपने बच्चे की तरह पाला। फिल्म में कर्मबीर और भारती की कहानी ही इसका हरियाणा और पंजाब कनेक्शन सामने लेकर आई है।

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