कुंभ से पहले इलाहबाद में किन्नरों ने निकाला जुलुस, मांग रहे हैं अपना हक

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इलाहाबाद में कुछ ही दिनों में कुंभ मेला शुरु होने जा रहा है और इससे पहले वहाँ पर कुछ हटके चीजें नजर आ रही है। इसी तरह का कुछ अलग हुआ रविवार को जब ट्रांसजेंडर लोगों की एक हिंदू मंडली के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक जुलूस देखा गया। कुंभ मेला उत्सव के आगे, ट्रांसजेंडर साधुओं  से आशीर्वाद लेने के लिए इलाहाबाद की सड़कों पर हजारों लोग उमड़ पड़े।

हाल ही में सुप्रीम कोरट के आदेश के बाद समलैंगिक यौन संबंध को वैध बनाया था औऱ इसके अलावा ट्रांसजेंडर लोगों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता भी दी थी। कुंभ में आने वाले दिनों में, हिंदू धर्म के 13 आधिकारिक अखाड़े, प्रत्येक त्योहार पर अपने आगमन को चिह्नित करने के लिए जुलूसों में शामिल होता है।

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ये जुलुस काफी प्रतिष्ठित होते हैं क्योंकि लोग पवित्र पुरुषों और महिलाओं को देखने के लिए लाइन लगाते हैं। अन्य अखाड़ों का कहना है कि वे सदियों पुराने हैं और आसानी से एक नई मण्डली (ट्रान्सजेन्डर) निर्माण की अनुमति नहीं दे सकते। जूना अखाड़े के प्रवक्ता विद्यानंद सरस्वती ने कहा, “कुंभ एक ऐसी जगह है जहां हर किसी का स्वागत है और हम ट्रांसजेंडर लोगों का भी स्वागत करते हैं। लेकिन उन्हें अखाड़े के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती है।”

लेकिन कुछ धार्मिक नेता किन्नर अखाड़े का समर्थन करते हैं। उत्तर भारत के एक प्रमुख मंदिर के पुजारी ने बताया, “हिंदू धर्म ने हमेशा ट्रांसजेंडर लोगों की उपस्थिति को स्वीकार किया है।” रविवार का यह जुलुस काफी खास था। इसकी सामान्य धूमधाम थी – झांकियां, संगीत बैंड, ऊंट और घोड़े थे लेकिन साधु सभी ट्रांसजेंडर थे। उम्मीद है कि जिस तरह कानून ने उन्हे उनका हक  दिया है, हमारे धर्म भी उन्हें अपनाएंगे और इस बदलाव की हवा में कुछ बदलाव यहाँ भी होगा।

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