जूली चौरसिया
Vinesh Phogat: इस समय विनोश फोगाट के पेरिस ओलंपिक से डिस्कोलिफाई होने पर पूरे देश का दिल टूट सा गया है। इसके साथ ही बहुत से सवाल भी लोगों के मन में आ रहे हैं, कि आखिर उस एक रात में ऐसा क्या हो गया, कि उनका वज़न अचानक से बढ़ गया। क्या उनके खिलाफ साजिश रची गई है, क्या वह देश की स्पोर्ट्स की राजनिती की बली चढ़ गई है। इसी तरह से कांग्रेस के रणदीप सूरजेवाला ने भी कई सलाव खड़े किए हैं, उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेस के ज़रिए सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए, इसके साथ ही उन्होंने इसे दिल्ली में खिलाड़ियों द्वारा किए गए प्रोटेस्ट से भी जोड़ा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश की बेटी विनेश कुश्ती में नहीं हारी, बल्कि वह साजिश़ का शिकार हो गईं।
ओलंपिक में देश से बहुत से अधिकारी (Vinesh Phogat)-
इसके साथ ही ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी खिलाड़ी को 100 ग्राम वज़न के चलते डिस्कॉलिफाई किया गया हो, वज़न ज्यादा होने पर भी उन्हें दो घंटे का समय दिया जाता है, पर ऐसा कुछ क्यों नहीं हुआ। पेरिस ओलंपिक में देश से बहुत से अधिकारी पहुंचे थे और खिलाड़ियों से ज्यादा संख्या में यह अधिकारी वहां मौजूद थे, जिन्हें खेलना नहीं था, इसके साथ ही वहां पर नीता अंबानी भी मौजूद थी, जो कि इंटरनेशनल ओलंपिक कमेंटी की मेंबर हैं। अगर यह सब गए थे, तो वहां कर क्या रहे थे। उन्होंने देश के खिलाड़ियों के साथ वहां जो अन्याय हो रहा है उसके लिए आवाज़ क्यों नहीं उठाई।
रणदीप सूरजेवाला (Vinesh Phogat)-
इसके साथ ही रणदीप सूरजेवाला का कहना है कि यह वही विनेश फोगाट हैं, जिन्होंने देश के खिलाड़ियों के लिए कई महीनों तक दिल्ली में धरना दिया था और एक क्रांति की लो जलाई थी, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह को बचाने के लिए भाजपा सरकार ने उनकी आवाज़ को दबाया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान विनेश फोगाट समेत कई खिलाड़ियों को यह कहा गया था, उनका करियर खत्म कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार इस पर सांत्वना क्यों दे रही है, वह आवाज़ क्यों नहीं उठा रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि वह पहली बार तो खेल में शामिल नहीं हुई हैं।
गोल्ड मेडल जीतने से दिक्कत-
वह कई मेडल जीत चुकी हैं। कहीं किसी को उनके गोल्ड मेडल जीतने से दिक्कत तो नहीं थी। इसके अलावा खिलाड़ी फेडरेशन को एक मौका दिया जाता है कि कोई परेशानी होने पर वह खिलाड़ी को इंजर्ड घोषित कर दें, जिससे उसे सिल्वर मेडल दे दिया जाता है और खेल से खिलाड़ी बाहर हो जाता है। लेकिन यह सभी नियम जानते हुए भी ऐसा नहीं किया गया। कम से कम उन्हें उनका सिल्वर मेडल तो मिल जाता, लेकिन ऐसा कुछ क्यों नहीं किया गया। देश के खेल मंत्री को पेरिस में होना चाहिए, वह यहां क्या कर रहे हैं।
खेल मंत्री और प्रधानमंत्री-
उन्होंने कहा कि देश के लोगों के मन में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या जो प्रधानमंत्री दो देशों रुस और यूक्रेन के युद्ध को रुकवा सकते हैं, वह विनेश के लिए न्याय नहीं मांग सकते। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि देश के खेल मंत्री और प्रधान मंत्री इस मामले में कुछ करेंगे। राहुल गांधी, सोनिया गंधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सभी उनके साथ हैं और जब वह देश वापिस आएंगी तो उनका स्वागत किसी गोल्ड मेडल जीते हुए खिलाड़ी से भी ज्यादा अच्छे से किया जाएगा। क्योंकि उन्होंने देश के लोगों के दिल के गोल्ड मेडल को जीत लिया है।
बृजभूषण शरण सिंह-
ऐसा भी कहा जा रहा है कि भले ही खिलाड़ियों द्वारा किए गए आंदोलन के चलते बृजभूषण शरण सिंह रेसलिंग फेडरेशन से हट गए हो, लेकिन आज भी रेसलिंग फेडरेशन में उनके लोगों की काफी चलती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, विनेश फोगाट के परिवार का कहना है कि जब से उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया है, सरकार ने उनका साथ छोड़ दिया है। इसके साथ ही हर कदम पर उनके लिए बाधांएं उत्पन्न की जारी है। यहां तक की उन्हें ओलंपिक में जाने के लिए उनके वीज़ा के लिए रिक्वेस्ट करनी पड़ी। जबकि अन्य खिलाड़ियों के लिए यह सभी तरह के इंतेज़ाम काफी समय पहले ही कर दिए गाए थे।
ये भी पढ़ें- क्या बांग्लादेश में फेल हो गई देश की विदेश नीति? इस चैलेंज के कैसे निपटेगी मोदी सरकार..
देश में न्याय नहीं-
विनेश को ओलंपिक में जाने से रोकने की बहुत कोशि की गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि देश की खिलाड़ी बेटियों को देश में न्याय नहीं मिला, इसके चलते हरियाणा में अन्य बेटियों ने भी इन खेलों से मुंह मोड़ लिया है। क्योंकि लोगों का कहना है कि खेल के मैदान में तो वह लेगी, लेकिन क्या देश का सिस्टम उन्हें सपोर्ट करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि खेल फेडरेशन में बहुत बड़ी राजनिती होती है। साथ ही नाइंसाफी भी की जाती है, जैसे कि खेलों के लिए गुजरात में सबसे ज्यादा पैसा सरकार की ओर से लगाया जाता है जबकि वहां से बहुत कम खिलाड़ी आते हैं। वहीं दूसरी ओर जिस हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश को सबसे ज्यादा मेडल दिलाए हैं, उस पर बहुत कम पैसा लगाया जाता है।
ये भी पढ़ें- भारत ने विनेश के लिए की अपील, क्या पैरिस ओलंपिक में वापस मिलेगी फोगाट को जगह?
