Snake Bites: सांपों की 300 से भी ज्यादा प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं, जिसमें से 66 तरह के सांप ऐसे होते हैं, जो जहरीले होते हैं, वही 42 ऐसे हैं जिनमें थोड़ा कम जहर होता है और सांपों की 23 प्रजातियां मेडिकल लिहाज से अहम मानी जाती हैं। क्योंकि उनके काटने से इंसान की मौत हो सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से सांपों के काटने को अधिसूचित रोग बनाने का आग्रह किया है यानी कि ऐसी बीमारी जिसके बारे में निजी और सरकारी दोनों तरह के अस्पतालों को सरकार को खबर करना कानूनी रूप से जरूरी होगा। सरकार को ऐसा कदम आखिर क्यों उठाना पड़ा है, यह नियम क्या है और इस नियम से क्या बदल जाएगा आईए जानते हैं-
सांपों की प्रजातियां (Snake Bites)-
यह तो हम पहले जान चुके हैं कि भारत में 23 सांपों की प्रजातियां ऐसी हैं, जिनके काटने से इंसान मर जाता है। हालांकि सांप के काटने के लगभग 90% मामले चार प्रजातियां रसेल वाइपर, इंडियन कोबरा, सॉ-स्केल्ड वाइपर और कॉमन करैत आते हैं। इन चारों को बिग फोर भी कहा जाता है। अभी जो पॉलीवैलेंट एंटी वेनम बाजार में मिलता है, उसमें इन चारों प्रजातियों का जहर होता है और यह सांप काटने के 80% मामलों में प्रभावी है। वहीं भारत में सांपों के काटने से होने वाली मौते चिंता की एक बड़ी वजह बन चुकी है। हर साल सांप के काटने के 30 से 40 लाख लोगों को मामले सामने आ रहे हैं।
महामारी फैलने और बड़े पैमाने-
2020 की इंडियन मिलियन डेथ स्टडी के मुताबिक, सांप के काटने से हर साल 58,000 लोगों की जान जा रही है। अधिसूचना रोग यानी नोटिफिएबल डिजीज उन्हें कहते हैं, जिससे महामारी फैलने और बड़े पैमाने पर मौतें होने की आशंका जताई जाती है। इसमें वह बीमारियां भी शामिल हैं, जिनके बारे में जल्द से जल्द जांच करने की जरूरत होती है। जिससे पब्लिक को सेफ रखा जा सके और हर राज्य में अनुसूचित रोगों की सूची अलग-अलग होती है। हालांकि उनमें से ज्यादातर एचआईवी, टीवी, हैजा, डेंगू, मलेरिया और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमणों को नोटिसेबल मानते हैं। ज़हरीले सांपों के काटने से गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है।
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एंटी वेनम से इलाज-
जिसमें तत्काल इलाज की जरूरत पड़ती है, वहीं सांप के काटने से रुक सकती है, हेमरेज हो सकता है और अलग-अलग नुकसान पहुंच सकता है। सांप के काटने पर एंटी वेनम से इलाज किया जाता है। जिससे मृत्यु और लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सके। केंद्र सरकार के इस कदम से सांप के काटने के मामलों में प्रॉपर निगरानी की संभावना हो सकती है। भारत में हर साल कितने मामले आते हैं और कितनी मौतें हो जाती हैं। इसका भी सटीक उत्तर नहीं मिल पाया है। इससे उन्हें इलाकों में पर्याप्त एंटी वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा सकती है। जहां पर सांप काटने के मामले ज्यादा आते हैं।
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