Airports: भारत सरकार ने छोटे शहरों और कस्बों में नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना (Ambitious Plan) शुरू की थी, लेकिन इस योजना में कई बाधाएं सामने आ रही है। कई नए एयरपोर्ट यात्रियों को आकर्षित करने में संघर्ष कर रहे हैं और कुछ तो भूतिया एयरपोर्ट में तब्दील हो गए हैं। भारी निवेश के बावजूद, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जैसे नए एयरपोर्ट बड़े पैमाने पर इनैक्टिव पड़े हैं, क्योंकि एयरलाइंस यात्रियों की डिमांड के कम होने का हवाला देते हुए, अपनी उड़ानों को कम कर रही हैं।
आठ महीने तक सैड्युल्ड फ्लाईट नहीं (Airports)-
उदाहरण के तौर पर केंद्रशासित प्रदेश पॉंडिचेरी ने इस साल लगातार आठ महीने तक कोई भी सैड्युल्ड फ्लाईट नहीं देखी। हालांकि सिर्फ 20 दिसंबर को हालात थोड़े सही हुए, जब बेंगलुरू से एक 78-सीटर टर्बोप्रॉप फ्लाईट पॉंडिचेरी एयरपोर्ट पर उतरा। इंडिगो की इस उड़ान का स्वागत एक जल तोप सलामी (Water Cannon Salute) से किया गया, जो इस बात की निशानी थी, कि ऐसी जगहों पर हवाई यातायात नियमित नहीं है।
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Airports)-
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जिसका अक्टूबर 2021 में सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड परियोजना के तहत उद्घाटन किया गया था, यह एयरपोर्ट भी अप्रैल से उड़ानों के बिना पड़ा हुआ है। यह एयरपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने के लिए बनाया गया था और विशेष रूप से बौद्ध तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए था, लेकिन अब यह वीरान पड़ा है।
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, कुर्नूल (आंध्र प्रदेश), पाकयोंग (सिक्किम) और सिंधुदुर्ग (महाराष्ट्र) जैसे अन्य नए एयरपोर्ट का भी यही हाल है। इसके अलावा, महाराष्ट्र के सोलापुर एयरपोर्ट को 65 करोड़ रुपये की लागत से फिर से सुसज्जित किया गया था, लेकिन यह भी निष्क्रिय पड़ा है।
स्पाइसजेट और UDAN योजना(Airports)-
सिंधुदुर्ग जहां गोवा के समुद्री पर्यटन को चुनौती देने की योजना थी और कुशीनगर, जो धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, दोनों ही खराब यात्री मांग और अव्यावसायिक संचालन के कारण मुश्किल में हैं। यही कारण है कि एयरलाइंस जैसे स्पाइसजेट और UDAN योजना के तहत अपनी उड़ानें बंद कर दी हैं। स्टार एयर के CEO सिमरन सिंह तिवाना ने इन चुनौतियों पर रोशनी डाली। उनका कहना है, UDAN योजना के तहत टिकट की कीमतों की सीमा ने Tier-2 और Tier-3 शहरों के लिए हवाई यात्रा को किफायती बना दिया है।
यात्री मांग बनाए रखना एक चुनौती-
हालांकि कुछ जगहों पर लगातार यात्री मांग बनाए रखना एक चुनौती है। स्टार एयर जो नौ विमानों के बेड़े के साथ काम कर रही है, 20 Embraer जेट फ्लाईट के साथ विस्तार करने की योजना बना रही है। हालांकि, तिवाना ने यह भी बताया, कि छोटे क्षेत्रीय एयरपोर्ट अक्सर ऐसे इलाकों में होते हैं, जहां जनसंख्या कम होती है और पर्यटन की आवाजाही सीमित होती है, जिससे नियमित उड़ानें बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। कोविड-19 महामारी, वैश्विक विमान इंजन की समस्याएँ और कुछ एयरलाइनों का बंद होना भी इस संकट को बढ़ा रहा है।
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नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री-
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहाल ने लोकसभा में बताया, कि इन कारणों के साथ-साथ कम यात्री मांग ने कई जगहों को बंद करने पर मजबूर कर दिया है। इन सभी चुनौतियों के बावजूद, सरकार आशावादी बनी हुई है। अपनी विकसित भारत 2047 योजना के तहत भारत का लक्ष्य वर्तमान में 157 एयरपोर्ट से उनकी संख्या को बढ़ाकर 350 करना है। इसके लिए अलवर (राजस्थान), सिंगरौली (मध्य प्रदेश) और परंदुर (तमिलनाडु) जैसे नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए साइट क्लीयरेंस पहले ही दिया जा चुका है।
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हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा-
हालांकि सरकार क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने में जुटी हुई है, लेकिन कुशीनगर और सिंधुदुर्ग जैसे एयरपोर्ट की स्थिति यह कड़ी सच्चाई उजागर करती है, कि केवल अवसंरचना बनाने से यात्री मांग नहीं बढ़ती। अगर इन एयरपोर्ट के पास स्थिर यात्री संख्या नहीं होती, तो ये महत्वपूर्ण लेकिन कम इस्तेमाल की जाने वाली प्रोपर्टी बनकर रह सकते हैं।
