जानें : कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह में मंच पर क्यों नहीं आए अरविंद केजरीवाल

अरे भाई केजरीवाल ने क्यों काटी कन्नी?

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PTI Photo

अजय चौधरी
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल दिल्ली से कर्नाटक कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने तो पहुंच गए लेकिन मंच तक नहीं पहुंचे। सब यही जानना चाहते हैं कि केजरीवाल मंच तक क्यों नहीं पहुंचें। इसके पीछे क्या कारण हैं? अगर मंच पर सबके साथ नहीं जाना था तो फिर कार्यक्रम में ही शामिल क्यों हुए। अपना दिल्ली ही बैठे रहते।

आपको बता दें कि जेडीएस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी बुधवार को दूसरी बार कर्नाटक के सीएम बने हैं। समारोह के मंच पर जो लोग विराजमान थे उनमें अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, मायावती, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, चंद्रबाबू नायडू, एमके स्टालिन शामिल हैं। समारोह में बुआ -भतीजा मतलब अखिलेश और मायावती की जोडी, मायावती और सोनिया की जोडी छाई रही, सोनिया गांधी का मायावती को गले लगाना तो मानों वायरल ही हो गया। मीडिया के कैमरे भी इनके हर कदम की तरफ घूमते नजर आए। अखिलेश और मायावती की बॉडी लैंग्वेज से तो ऐसा लग रहा था मानों इन्होंने कोई किला जीत लिया हो।

बस सबकी नजर जिसे ढूंढ रही थी वो थे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल। लोग शपथ ग्रहण समारोह की वीडियो और फोटो बडे ध्यान से देख रहे थे और एक दूसरे से पूछ रहे थे कि यार केजरीवाल नहीं दिख रहा कहीं। अरे भाई दिखते कैसे केजरीवाल सहाब तो मंच पर चढ़े ही नहीं। केजरीवाल ने अखिलेश यादव, ममता बनर्जी,सीताराम येचुरी,चंद्रबाबू नायडू से कार्यक्रम शुरु होने से पहले ही अलग अलग मुलाकात कर ली।

आपको बता दें कि ये सारे दलों के नेता बीजेपी के खिलाफ आने वाले 2019 के लोकसभा चुनावों में साथ मिलकर चुनाव लडने की योजना बना रहे हैं। केजरीवाल को भी इनका साथ तो चाहिए लेकिन वो खुलकर सामने भी नहीं आना चाहते। अब केजरीवाल के इस व्यावहार के कई मायने लगाए जा रहे हैं। दरअसल केजरीवाल वंशवाद वाली राजनीति को नकारते रहे हैं। जबकि कुमारस्वामी तो वंशवाद पर ही चल रहे हैं। उनके पिता देवगौडा भारत के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

दूसरा केजरीवाल की छवी ईमानदार नेता की है पर कुमार स्वामी पर तो भ्रष्टाचार के आरोप हैं। ऐसे में कहीं वो फिर से विवादों में न घिर जाएं इसलिए हो सकता है केजरीवाल ने समारोह में जाकर भी समारोह से दूरी बनाए रखी। क्योंकि आपको याद ही होगा जब केजरीवाल नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में पटना गए थे तो उन्हें न चाहते हुए भी लालू यादव से हाथ मिलाने पडे थे। तब केजरीवाल की भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति पर सवाल उठाए गए थे। तो इसलिए इस बार केजरीवाल ने सेफ गेम खेलना ही उचित समझा।

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