भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आज ही दिल्ली में राज्य के सभी बड़े पार्टी नेताओं के साथ बैठक की, जिसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का फैसला किया है। इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी के ऐलान के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। शाम चार बजे पीडीपी की बैठक बुलाई गई है। BJP कोटे के सभी मंत्रियों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
राम माधव ने कहा कि जनता के जनादेश को ध्यान में रखकर हमने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार चलाने का निर्णय लिया था। लेकिन पीडीपी-बीजेपी गठबंधन को लेकर आगे चलना संभव नहीं हो रहा था। बीजेपी महासचिव राम माधव ने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की सहमति के बाद गठबंधन तोड़ने पर फैसला किया गया।”
गठबंधन तोड़ने के मुद्दे पर आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बैठक की। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ बीजेपी नेता और पार्टी के कोटे से मंत्री मौजूद थे। आपको बता दें कि बीजेपी और पीडीपी में सीजफायर, कठुआ गैंगरेप मामले की जांच, सरकार में भागीदारी को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। 87 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीडीपी की 28, बीजेपी की 25 सीटें हैं। दोनों दलों ने चुनाव के बाद गठबंधन किया था।
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने मौजूदा सियासी हलचल पर कहा कि जो कुछ भी हुआ वह अच्छा है। जम्मू-कश्मीर के लोगों को राहत मिलेगी। बीजेपी ने कश्मीर को बर्बाद कर दिया और अब उन्होंने समर्थन वापस ले लिया है। बीजेपी-पीडीपी के तीन साल के शासन के दौरान सबसे अधिक सुरक्षाबलों और कश्मीरी नागरिकों की मौत हुई है।
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