जानें क्या है स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट और इससे किसानों को क्या लाभ होगा

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जब भी किसानों के हक की बात होती है या फिर किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में आते हैं तो स्वामीनाथन रिपोर्ट की बात सामने आ ही जाती है। किसान इसे लागू करने की बात कहते हैं और सरकार हर बार इसे लागू करने का वादा कर देती है लेकिन लागू नहीं करती। आज हम इस वीडियो में जानेंगे की क्या है स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट और किसानों के लिए क्या है इसके फायदे। लेकिन उससे पहले जान लेते हैं कौन हैं स्वामीनाथन?

प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन जिन्हें हरित क्रांती का जनक भी कहा जाता है एक जेनेटिक वैज्ञानिक हैं। जो तमिलनाडु के रहने वाले हैं। इन्होंने सन 1966 में मेक्सिकों के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिलाकर गेहूं की एक नई किस्म विकसित की जिसे संकर बीज के नाम से जाना गया। इसके बाद गेहूं के उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अब जान लेते हैं क्या है स्वामीनाथन आयोग-

2004 में यूपीए की सरकार ने किसानों की स्थिती में सुधार के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया। आयोग का अध्यक्ष स्वामीनाथन को बनाया गया। इस आयोग ने दो साल के अंदर यानी की 2006 तक अपनी पांच रिपोर्टें सरकार को सौंप दी। लेकिन किसानों के भले के लिए सौंपी गई इन रिपोर्टों को न तो कांग्रेस सरकार ने और न ही मौजूदा भाजपा सरकार ने लागू करने की जहमत उठाई। भले ही हर किसान रैली में इसे लागू करने की बात उठती रही हो।

अब जान लेते हैं अगर ये रिपोर्ट लागू हो जाती है तो उससे किसानों का किस तरह भला होगा? आप रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों पर गौर करेंगे तो ही आप समझ पाएंगे की कोई भी सरकार हो वो इस रिपोर्ट को लागू क्यों नहीं करती?

रिपोर्ट के अनुसार

फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास फीसदी ज़्यादा दाम किसानों को मिले।

– किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज कम दामों में मुहैया कराए जाएं।

– गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाया जाए।

– महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं।

– किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल सके।

सरप्लस और इस्तेमाल नहीं हो रही ज़मीन के टुकड़ों का वितरण किया जाए।

– खेतीहर जमीन और वनभूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कॉरपोरेट को न दिया जाए।

– फसल बीमा की सुविधा पूरे देश में हर फसल के लिए मिले।

– खेती के लिए कर्ज की व्यवस्था हर गरीब और जरूरतमंद तक पहुंचे।

सरकार की मदद से किसानों को दिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज दर कम करके चार फीसदी किया जाए।

– कर्ज की वसूली में राहत, प्राकृतिक आपदा या संकट से जूझ रहे इलाकों में ब्याज से राहत हालात सामान्य होने तक जारी रहे।

– लगातार प्राकृतिक आपदाओं की सूरत में किसान को मदद पहुंचाने के लिए एक एग्रिकल्चर रिस्क फंड का गठन किया जाए।

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