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Dastak India > Home > विचार > संजीव बालियान का मेरठ भाषण पश्चिमी यूपी की राजनीति और जाट नेतृत्व के बदलते समीकरणों का स्पष्ट संकेत
विचार

संजीव बालियान का मेरठ भाषण पश्चिमी यूपी की राजनीति और जाट नेतृत्व के बदलते समीकरणों का स्पष्ट संकेत

dastak
Last updated: March 30, 2026 4:53 pm
dastak
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Jayant Chaudhary & Sanjeev Baliyan
File Photo
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डा. रविंद्र राणा

किसके पेट में दर्द है …!

मेरठ के सकौती गांव में डॉ. संजीव बालियान ने एक आक्रामक और भावनात्मक भाषण दिया। पहली नजर में यह सिर्फ एक सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन लगता था, लेकिन गहराई में देखने पर यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति, जाट समाज की दिशा और भविष्य की संभावित राजनीतिक संरचनाओं का संकेत देता है ।

कार्यक्रम का केंद्र बिंदु था महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण। इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिग्विजय चौटाला और हनुमान बेनीवाल जैसे नेता भी मौजूद थे। डॉ. बालियान ने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के इन नेताओं की एक साथ मंच पर उपस्थिति से बहुत लोगों के पेट में दर्द है । आख़िर बालियान संकेतों में किस पर हमला कर रहे थे ? कुल मिलाकर भगवंत मान और हनुमान बेनीवाल के साथ बालियान के शब्द बाणों ने कार्यक्रम को सुर्खियों में ला दिया!

डॉ. बालियान ने भाषण की शुरुआत इन शब्दों से की कि “बहुत दिनों से गला घुट रहा था।” यह उनके भीतर चल रहे राजनीतिक और व्यक्तिगत दबाव का संकेत था। नारेबाजी, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का स्मरण और ऊर्जावान माहौल के जरिए उन्होंने अपने समर्थकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की ।

भाषण में बार-बार जाट इतिहास और नायकों का उल्लेख किया गया। महाराजा सूरजमल के युद्ध, उनके बलिदान और दिल्ली विजय का उल्लेख समाज को उसके गौरवशाली अतीत से जोड़ने का प्रयास था। यह रणनीति पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभावी मानी जाती है, जहां जातीय पहचान राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रही है।

कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू था विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की साझा उपस्थिति। भगवंत मान, हनुमान बेनीवाल और दिग्विजय चौटाला के साथ डॉ. बालियान ने इसे “भाईचारे का समागम” बताया। राजनीतिक दृष्टि से यह एक संभावित “सॉफ्ट अलाइनमेंट” का संकेत था। यह मंच एक तरह से जाट राजनीतिक नेटवर्क के निर्माण की झलक देता है, जो उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब तक फैला हुआ है।

डॉ. बालियान ने भगवंत मान की खुले मंच से सराहना की और उन्हें किसानों का सच्चा नेता बताया। यह केवल शिष्टाचार नहीं था। इसके पीछे पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति को जोड़ने, संवाद बनाए रखने और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश था।

भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रशासन पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा था। बालियान ने कहा कि कार्यक्रम को रोकने की कोशिश हुई, उन्हें अपमान सहना पड़ा और हेलीकॉप्टर उतरने में बाधाएं आईं। शायद उन्होंने ये इस मंशा से किया की यह उन्हें “संघर्ष करने वाले नेता” की छवि देगा और समर्थकों में साझा भाव “हमारे साथ अन्याय हुआ” पैदा करेगा । हालांकि इससे मौजूदा सरकारी तंत्र में उनकी ढीली पड़ती पकड़ और यूपी सरकार से टकराव की स्पष्ट झलक है!

भाषण का सबसे तीखा हिस्सा था जब उन्होंने कहा “सूद सहित चुकावेंगे।” यह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं थी बल्कि विरोधियों के लिए चेतावनी और समर्थकों के लिए आह्वान था। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में राजनीतिक संघर्ष तेज हो सकता है। हालांकि समझने वाले ये समझ ही गए कि उन्होंने ये शब्द किसके लिए कहे! अगर आप भी समझ गए हैं तो यहाँ कमेंट में बताइए!

डॉ. बालियान ने कहा, “बहुत दिनों बाद ट्रैक्टर सड़कों पर दिखाई दिए।” यह शक्ति प्रदर्शन और एकजुटता दिखाने के लिए कहा गया।

डॉ. संजीव बालियान का भाषण कई स्तरों पर काम करता है। यह असंतोष को आवाज देता है, उनके सियासी भविष्य और 2027 में संभावित समीकरणों की झलक भी दिखाता है ! सकौती का यह मंच केवल एक सामान्य कार्यक्रम नहीं था बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ख़ासकर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों, ख़ासकर सरधना की राजनीति में नई हलचल की शुरुआत का संकेत है।

ये पोस्ट डा. रविंद्र राणा की फेसबुक वॉल से ली गई है, उपरोक्त विचार लेखक के निजी हैं।

TAGGED:jayant chaudharymaharaja surajmalsanjiv baliyanसकौती मेरठ
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