फॉक्सवैगन ही नहीं इन कंपनियों पर भी लगे 100 करोड का जुर्माना !

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अजय चौधरी

फॉक्सवैगन पर एनजीटी ने चीट डिवाइस इस्तेमाल करने पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया है और ये राशि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी कि सीपीसीबी में जमा कराने को कहा है। हमारी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करने वाली डीजल गाड़ियों पर ये उत्सहवर्धक कार्यवाही है। लेकिन नजर बनाए रखना कि आखिर होता क्या है, कंपनी जुर्माना राशि जमा कराएगी या फिर मामला कोर्ट में फसा देगी।

ये चीट डिवाइस प्रदूषण जांच के समय एक्टिव हो जाता था और उत्सर्जन परीक्षण में हेरफेर करता था। कंपनी ने इस डिवाइस के साथ 3.23 लाख गाड़ियों की बिक्री कर दी थी। ऐसे में आप समझ रहे होंगे कि कितने बड़े स्तर पर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया गया।

इसलिए मैं 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल के वाहनों पर प्रतिबंध के खिलाफ हूँ। मेरा मानना है कि इन वाहनों पर प्रदूषण जांच के आधार पर ही रोक लगाई जानी चाहिए उसकी उम्र से कोई लेना देना नहीं हो।

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बहुत कम लोगों को ये जानकारी है कि फॉक्सवैगन, स्कोडा और ऑडी ब्रांड की एक ही पेरेंट कंपनी है। बहुत सी गाड़ियां एक ही इंजन और बॉडी के साथ इन ब्रांड्स में अलग अलग नाम से बेची जाती हैं। ऐसे में स्कोडा औए ऑडी में भी चीप डिवाइस होने की जांच होनी चाहिए थी।

सिर्फ इन्हीं कंपनियों में ही क्यों बाकि सभी कंपनियों के साथ ऐसा होना चाहिए और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वाली गाड़ियों पर प्रतिबंध लगना ही चाहिए। लेकिन 2000 सीसी से अधिक गाड़ियों पर जब दिल्ली एनसीआर में रजिस्ट्रेशन पर रोक सुप्रीम कोर्ट ने लगाई तो ये सब कंपनिया सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने पंहुच गयी क्योंकि सभी गाड़ियां लक्ज़री थी और कंपनी की पंहुच भी ऊंची। चिंता आपको भी न थी इसलिए आप सब भी चुप रहे और ग्रीन टैक्स देने के नाम पर इन सब गाड़ियों पर से प्रतिबंध हट गया।

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समझना होगा सिर्फ किसान की पराली रोकने से काम नहीं चलेगा आपको अन्य कारणों पर भी गौर करना होगा…

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