प्रदूषण जांच के आधार पर क्यों नहीं हटते सड़क से वाहन

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Pollution in Delhi
Photo Source- Google

अजय चौधरी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द हो गया है। धारणा के अनुसार ये वाहन प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार थे। यानी कि ये पुराने होने की वजह से सामान्य वाहनों की अपेक्षा अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं। 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल के वाहनों को देखते ही जब्त करने का आदेश है।

लेकिन मेरा मानना है कि ये सब तथ्य के आधार पर होना चाहिए और इन आदेशों में तथ्य तो कहीं नजर ही नहीं आता। दिल्ली में बहुत सारे लोग वाहनों के शौकीन हैं, वो अपनी कारों को सालों सालों तक संभाल कर रखते हैं। अब ये जरूरी नहीं कि उनकी कार पुरानी होने के कारण प्रदूषण फैला ही रही होगी। क्यों नहीं प्रदूषण जांच के आधार पर वाहनों को सड़क से हटाया जाता।

बात सारी मेंटेन करने की है, अगर आप तय समय पर अपनी गाड़ी की सर्विस नहीं कराते, उसका ख्याल नहीं रखते तो वो 2 साल में ही 15 साल पुराने वाहन से ज्यादा प्रदूषण देने लगती है। ऐसे में आदेश के अनुसार हमें ऐसे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को 13 साल और झेलना पड़ेगा जो कहीं से भी जायज नजर नहीं आता।

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लेकिन अगर प्रदूषण के आधार पर वाहनों को सड़क से हटाया जाएगा तो बहुत सारी लग्जरी कार इसकी चपेट में आ जाएंगी। तो इस आधार पर वाहनों के सड़कों से हटने की कोई जुर्रत करेगा हम अपेक्षा भी नहीं कर सकते। ऐसे में जो भी कदम प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया जाए उसे सही ही कहिए…

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