सवर्ण जाति आरक्षण राज्यसभा में पास, राष्ट्रपति मुहर लगना बाकी

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Reservation of upper castes in Rajya Sabha, President's stamp to rest
Photo : Twitter

केंद्र की मोदी सरकार लोकसभा चुनाव को लेकर अपने बड़े दांव पेच चला रही है, जिसके चलते केंद्र ने सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सवर्ण जातियों को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने वाला बिल मंगलवार को लोकसभा में पास हो गया, तो वही बुधवार को इस बिल को राज्यसभा में पेश किया गया। जिसके बाद सवर्ण जाति के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों 10 फ़ीसदी आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक बिल राज्यसभा में 165 मतों के साथ पास हुआ। लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल के पास होने के बाद अब इस पर राष्ट्रपति की मुहर लगनी बाकी है। राष्ट्रपति मुहर लगने के बाद ये ही ये बिल प्रभावी होगा।

खबरों के अनुसार, राज्यसभा ने करीब 10 घंटे तक चली बैठक के बाद संविधान (124 वां संशोधन), 2019 विधेयक को 165 मतों से मंजूरी दे दी। इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया। लोकसभा ने इस विधेयक को मंगलवार को ही मंजूरी दी थी जहां मतदान में तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया था।

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खबरों की माने तो उच्च सदन में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया। कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाए जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जताई। हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिए लाया गया है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों से यह पूछा कि जब उन्होंने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का अपने घोषणापत्र में वादा किया था तो वह वादा किस आधार पर किया गया था। क्याउन्हें यह नहीं मालूम था कि ऐसे किसी कदम को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

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उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति की विशेषता है कि जहां प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एससी और एसटी को आरक्षण दिया वहीं पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने की यह पहल की है। साथ ही, उन्होंने एसटी, एससी एवं ओबीसी आरक्षण को लेकर कई दलों के सदस्यों की आशंकाओं को निराधार और असत्य बताते हुए कहा कि उनके 49.5 प्रतिशत से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है। वह बरकरार रहेगा।

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